जनतांत्रिक लोकहित पार्टी के प्रदेश महासचिव सुमन सौरभ ने SDPO प्रभाकर तिवारी के खिलाफ पुलिस महानिदेशक, पटना को लिखित आवेदन देकर षडयंत्र करने का लगाया आरोप । आवेदन में उन्होने कहा है कि NSUI के कार्यकर्ता जो थाना चौक जाम कर के उनकी गिरफ्तारी तथा सदर थाना प्रभारी के बदली का मांग कर रहे थे वो कई कुख्यात अपराधी तथा SDPO सदर श्री प्रभाकर तिवारी से नजदीकी प्रतीत होते हैं । उपरोक्त केस का जांच भी वही SDPO करेंगे तो दोषियो को सजा नही मिल सकता है। ज्ञात हो 15 अगस्त को महिषी थाना क्षेत्र में गेमरहो ईदगाह के समीप कुख्यात अपराधी अजीत यादव की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी।

सुमन सौरभ ने आवेदन में बताया कि,

मृतक तथा मृतक के मित्र के नाम और नंबर क्रमश: निम्न है ।

(1)अजीत यादव मोबाइल नंबर 700466215422)8252636748 (मनोज यादव )7368462256 ईन्दल यादव 97098090611,7061617593 नीतीश कुमार NSUI के कार्यकर्ता 9709881157 मनीष कुमार NSUI के राष्ट्रीय संयोजक।मृतक के भाई के बयान को पढ़ने के उपरांत कुछ महत्वपूर्ण बात संदेहास्पद लगी जो निम्न है ।मृतक का भाई अपने बयान में कहता है की मै 15/08/2020 को समय 10:30 में अपने भाई के साथ सहरसा से घर जा रहा था ।दुसरे लाईन में वो बताता है की जब वो महिषी थाना क्षेत्र के गेमरोहो ईदगाह चौक पर पहुंचता है तो देखता है की उसके भाई को 8 नामजद सहित 5 अन्य मिलकर गोली मार दिये जो गोली सर के ललाट पर लगी,अगले लाईन में वो बताता है की गोली लगने से दोनो गिर गया उसके बाद वो भाग गया । गौर करने वाली बात ये है की मृतक साथ में जा रहा था या देख रहा था?

(2) वही गोली सर पर 13 आदमी मिलकर मारा तो दोनो गिर गए और वह वहां से भाग गए, मृतक के भाई का भी इंजरी रिपोर्ट लिया जाय,दिए गए फर्द व्यान के अनुसार, क्यों कि चलती गाड़ी से दोनों गिरे।मृतक का भाई 13 आदमी को देखा भी 8 आदमी को पहचाना भी लेकिन गोली मारते किसी को नही देखा । “मृतक के भाई के मोबाइल लोकेशन से “पता लगाया जाए की घटना के वक्त का लोकेशन क्या था ।बयान देखने से ही प्रतीत होता है की उपरोक्त बयान मनगढ़न्त है साजिशपुर्ण है ।वहीं उन्होने मीडिया को बताया की महिषी थाना क्षेत्र का मामला होने पर भी महिषी थाना ना फर्द बयान लेने पहुची ना ही लाश को अपने कब्जे में लिया जो बहुत बड़ी लापरवाही दर्शाती है ।यही कई सवाल जाँच उपरांत पता लगाने की आवश्यक्ता है ताकि असली गुनेहगार को सजा दिलाया जा सके।जलोपा के प्रदेश महासचिव ने बताया की अपने बेगुनाही का साक्ष्य तथा संभावित लोगों का तस्वीर एवम आवेदन सभी वरीय पुलिस पदाधिकारी (SP सहरसा,DIG कोसी रेंज,व DGP बिहार ) को वाटसप्प द्वारा भेज चुका हूं, जिसके बाद SP सहरसा ने मेरे नम्बर को वाटसप्प पर ब्लॉक कर दिया है, जाँच निष्पक्ष हो कोई निर्दोष ना फसे इसलिये कुछ साक्ष्य,तस्वीर व महत्वपूर्ण जानकारी पुन: आवेदन के माध्यम से भी भेज दिये हो जो सम्बंधित विभाग में पहुंच चुका है । जिस पर निष्पक्ष जाँच हो तथा केस डायरी में स्पष्ट रूप से जिक्र हो । आवेदन में जाँच माँग में “उपरोक्त मोबाइल नंबर सहित “A) घटनास्थल पर उपलब्धियों का विवरण सेल नेटवर्क लोकेशन से निकाला जाए

B)घटना के समय उपस्थित व्यक्तियों का तार सहरसा पुलिस व राजनेता,छात्र नेता से जुड़े होने का भी संबंध निकाला जाए।

C) मृतक के पुराने रंजिश व उसके उपरोक्त लिखित सहित अन्य साथियों के बयान तथा लोकेशन को पेश किया जाए, तथा घटनास्थल से मिलान कर जांच कराई जाए ।

D) श्रीमान को पूर्व में दिये आवेदन पर भी ध्यानाकर्षण किया जाए

E) मृतक के अपराधी साथी तथा मनीष कुमार यादव, एनएसयूआई नीतीश कुमार यादव, एनएसयूआई रणवीर यादव, मनोज यादव, इंदल यादव के अपराधिक इतिहास को भी खंगाला जाए और पुलिस तंत्र से संपर्क पर भी जांच किया जाए ।

F) एसडीपीओ श्री प्रभाकर तिवारी से उपरोक्त राजनेता व छात्र नेता का संबंध व साथ उपलब्ध तस्वीरों पर स्पष्टीकरण मांगा जाए

G) घटना क्षेत्र महिषी थाना क्षेत्र का था फिर भी सहरसा सदर थानाध्यक्ष के निलंबन की मांग क्यों की गई ?,क्या यह राजनीतिक षड्यंत्र का मुख्य वजह था? इस साजिश में कौन कौन शामिल थे इसकी भी जांच होनी चाहिये ताकी दोषियों को सजा मिल सके ।

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