गलवान घाटी में हुए हिंसक झड़प के कारण अब सामने आ रहे है।मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो गलवान घाटी में चीन द्वारा कब्जा किये गए पोस्ट पर 12 जवान मौजूद थे।सेना के दोनों देशों के अधिकारियों के बीच वार्ता में यह सहमति बनी की दोनों देश के सैनिक पीछे हटेंगें लेकिन चीनी सेना ने पेट्रोलिंग के लिए गए 16 बिहार रेजीमेंट से  पीछे हटने से मना कर दिया।16 बिहार रेजीमेंट का नेतृत्व कर्नल संतोष बाबू कर रहे थे।ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि शायद इसी पेट्रोलिंग के वक्त ही चीनी सैनिकों से कुछ कहा सुनी हुई।

350 से 400 चीनी सैनिक अचानक सामने आ गए

मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो पैट्रोलिंग पर गई टीम वापस आने पर यूनिट में ये बाते शाझा की जाती है इसके बाद करीब 100 की संख्या में जवान 16 बिहार रेजीमेंट के कर्नल संतोष बाबू के साथ मौके पर जाने के लिए निकलते।

शायद चीनी सैनिकों को भी संतोष बाबू के तेवर से आभाष हो गया था की वो जल्द ही फिर लौटने वाले है इसलिए जब 16 बिहार रेजीमेंट के जवान चीनी पोस्ट पर पहुचते है तो वो चीनी सैनिकों पर समझौता के अनुसार अपने पोस्ट को हटाने का दवाब बनाते है,चीनी फौज के जवान इससे इनकार कर देते है जिससे माहौल गर्म हो जाता है कुछ भारतीय जवान उक्त पोस्ट के गड़े बाँस को उखाड़ने का प्रयत्न करते है।

इसी बीच अचानक वहां करीब 350 से 400 चीनी सैनिक आ जाते है।कर्नल संतोष बाबू और हवलदार पालिनी  पर सर्वप्रथम हमला होता है जो एक खूंखार संघर्ष में तब्दील हो जाता है।

यह संघर्ष करीब 4 से 5 घँटे चलता है।चीनी सैनिकों के पास कील वाले डंडे पाया जाना इस ओर इशारा करता है कि चीनी सेना की मंशा क्या थी।भारतीय सेना ने अपने से 4 गुना ज्यादा संख्या वाले सेना के साथ रात भर युध्द किया और पूरी दुनियां में भारतीय सेना की वीरता का परिचय दिया।

इस झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए वही मीडिया खबरों के अनुसार चीन के 43 सैनिकों की मृत्यु इस झड़प में हुई है वही मंत्री वी के सिंह ने 40 से 50 चीनी सैनिकों के मृत्यु होने का अनुमान लगाया है।आधिकारिक तौर पर न ही भारत की ओर से न ही चीन की ओर से चीनी सैनिकों के नुकसान पर अब तक कोई आंकड़ा दिया गया है हालांकि चीन के विदेश मंत्रालय ने ये माना है कि चीन के सैनिको को भी नुकसान पहुँचा है।

जिम्मेदारी कौन लेगा


यह सवाल बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है कि चीनी पोस्ट को खाली  कराने गए 16 बिहार रेजिमेंट के जवान को बेक अप ज्यादा से ज्यादा संख्या में क्यो नही था?

इतने तनावपूर्ण माहैल में आपातकाल सेवा अलर्ट में थी तो उसे मौका ए वारदात तक पहुंचते पहुंचते में इतना लंबा वक्त क्यो लग गया?

घटनाक्रम से  इस बात के संकेत मिलते है यदि समय रहते बेकअप टीम मौके पर पहुंच जाती तो इतने जवानों की शहादत नही होती।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here